मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

बिहार में सिने सोसाइटी की स्थापना और सिनेमा का प्रसार

-रविराज पटेल
भारत में सिनेमा का विकास सृजन से लेकर आज वृहत रूप ले चूका भारतीय फिल्म उद्योग को समृद्ध बनाने में विभिन्न प्रान्तों एवं क्षेत्रों में सिने समुहों का बड़ा योगदान रहा है.प्रारंभ में समूहों का गठन तो खूब होता था, परन्तु पंजीकरण साक्ष्य उपलब्ध न हो पाना कठिन कार्य था.कारण, देश ग़ुलाम था. सिनेमा घरों का आभाव तो था ही ,बाबजूद उसके फिल्मों का विस्तार तेज़ी से होता रहा ,जिसमे सबसे अहम् भूमिका सिने समूहों का रहा है . सिने समूहों के ही सहयोग से देश के प्रमुख शहरों ,कस्बों एवं गाँव -गाँव तक पंडालों में पर्दा लगा कर फिल्मों को दिखाया जाना संभव हो पाता था.
इसी बीच १९४७ में देश आज़ाद होने के तुरंत बाद ही सिनेमा के पितामह स्व. सत्यजीत रॉय के द्वारा स्वतंत्र भारत का पहला फिल्म सोसाइटी "कलकत्ता फिल्म सोसाइटी" की स्थापना की गई. इसी बीच विजया मुले नामक डोक्युमेंटरी फिल्मकार , इतिहासकार ,लेखिका , शिक्षिका,शोधपरक एवं सुविख्यात फ़िल्मकार सत्यजीत रॉय ,लुईस माले एवं मृणाल सेन के बहुत ही नजदीकी दोस्त मानी वाली,सन १९४० के आस पास वह अपने पति के साथ पटना स्थान्तरित हो कर आयीं थीं.श्रीमती मुले महाराष्ट्र के रहने वाली थी. स्नातक की डिग्री उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से ही लिया है. पटना से 1946 में लीड्स, विश्वविद्यालय,ब्रिटेन में मास्टर डिग्री अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति भी जीतीं .उसी दौरान श्रीमती मुले ब्रिटेन गईं और वहां के रंगमंच पर श्रमिक एकता के लिये एक भूमिका निभाई थी.,तभी ब्रिटेन में ही एक बेहतर सिनेमाई कला की समझ प्राप्त करने के लिये "लीड्स विश्वविद्यालय सिने सोसाइटी" की सदस्य भी बन गईं और वापस पटना आ कर उन्हें क्लासिक्स, प्रयोगात्मक और समाजवादी सिनेमा देखने एवं दिखाने का जूनून सा हो गया था. फलस्वरूप लीड्स विश्वविद्यालय में सिनेमा की ओर जागरूकता देख एवं सत्यजीत रॉय से उत्प्रेरित हो कर पटना के कुछेक सिने प्रेमियों के संपर्क में आना शुरू कर दीं जिन में पटना विश्वविद्यालय के प्राध्यापक देवी दास चटर्जी , न्यायमूर्ति बी.एन.प्रसाद ,पत्रकार अरुण राय एवं अन्यों के सहयोग से सन १९४८ में "पटना सिने सोसाइटी "समूह स्थापित कर "फेडरेशन ऑफ़ फिल्म सोसाइटी ऑफ़ इंडिया" से संबद्द भी कराया . "पटना सिने सोसाइटी" का विकास एवं प्रसार होने लगा और फिल्मों का प्रदर्शन (स्क्रीनिंग ) सबसे पहले पटना के तत्कालीन पैलेस ऑफ़ भेराइटीज जिसे आज हम लेडी स्टीफेंसन हॉल के नाम से जानते हैं.तीस चालीस के दशक में सिनेमा का मुख्य केंद्र यहीं माना जाता था . उन दिनों कैलाश बिहारी सिन्हा (रीजेन्ट सिनेमा के मालिक ) का सिने शो भी इसी हॉल में चला करता था. सन १९२९ में तत्कालीन पटना लोन (पूर्वी गाँधी मैदान) से सटे रीजेंट सिनेमा का जन्म हुआ .
रीजेंट के मालिक कैलाश बिहारी सिन्हा के पुत्र सुशील कुमार श्रीवास्तव इसका कमान संभाले वर्तमान में इन्हीं के सुपुत्र सुमन कुमार सिन्हा यानि कैलाश बिहारी सिन्हा के पौत्र इसे सफलता पूर्वक आज भी चला रहे हैं . पचास के दशक में सुशील जी के द्वारा सहयोग स्वरुप रविवार का मोर्निंग शो बहुत ही निम्न दरों पर बुक कराया जाता था (लगभग अस्सी रूपये में पूरा हॉल बुक) और सिने प्रेमिओं एवं शिक्षविद्दों इसका भरपूर लाभ उठा पाते थे .
लगभग १९५६-५७ के आसपास सोसाइटी द्वारा एक प्रोजेक्टर भी लिया गया था जो अब भी पटना साइंस कॉलेज में उपलब्ध है ,लेकिन उसका कोई साक्ष्य न रहने के कारण सोसाइटी उस पर दावा नही कर पा रही है.

कुछ समय बाद श्रीमति मुले का स्थान्तरण दिल्ली हो गया और वह वहां भी सन १९५९ में "दिल्ली फिल्म सोसाइटी" की स्थापना कीं. वह सन १९६२ से १९६६ तक केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड में भारतीय एवं विदेशी फिल्मों के पीठासीन अधिकारी एवं बाद में एफ. एफ. एस. आई. की अध्यक्ष के रूप में भी प्रतिनियुक्त रहीं.

ज्ञातव्य हो की श्रीमति मुले जानी मानी अभिनेत्री सुहासिनी मुले (राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता) की माँ हैं . सुहासिनी मुले का जन्म स्थली भी पटना है .श्रीमती मुले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की भी करीबी मानी जाती थीं.
सोसाइटी स्थापना के तत्पश्चात बिहारी सिने प्रेमियों को भी विश्व पटल पर भारतीय सिनेमा एवं संस्कृती से रु-ब-रु होने का लगातार अवसर मिलता रहा. परन्तु लोगों का वही उस्साह बरकरार न रह पाया, समय बीता और ऐसे ही एक सिने इतिहासकार एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तथा भुवनेश्वर (ओड़िसा) के मूल निवासी तत्कालीन जिलाधिकारी श्री आर.एन. दास जो भा.प्र. से . से अवकाश प्राप्त कर जाने के बाद भी सोसाइटी को संजोये पटना में हैं, को सोसाइटी से जुड़ने का अवसर मिला ,फिर से पटना सिनेमाई रंग में रंगता नज़र आने लगा श्री दास के पहल पर ही सन १९७४ में पटना सिने सोसाइटी का निबंधन बिहार सरकार के निबंधन विभाग से संस्था पंजीकरण एक्ट २१,१८६० के तहत गैर सरकारी संस्थान के रुप में पंजीकृत करा लिया गया, तथा सोसाइटी पूर्व से ही फेडरेशन ऑफ़ फिल्म सोसाइटी ऑफ़ इंडिया से संबद्द तो था ही .यह बिहार की एकमात्र संस्था है जो फेडरेशन ऑफ़ फिल्म सोसाइटी ऑफ़ इंडिया से मान्यता प्राप्त है . निबंधित सोसाइटी के प्रथम अध्यक्ष हरी अनुग्रह नारायण ,सचिव सुजीत दास तथा कोषाध्यक्ष आशीष बरन दत्ता को बनाया गया . आर एन दास भी कई बार इसके अध्यक्ष चुने गये हैं . इस कड़ी में पटना के जाने माने चिकित्सक ,प्रशासनिक पदाधिकारी ,कलाकार ,पत्रकार ,साहित्यकार ,नाटककार ,अधिवक्ता ,शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े शिक्षाविद्दों ,सिनेमा में रूचि लेने वाले व्यक्तियों एवं विद्यार्थियों का एक बड़ा ज़त्था सोसाइटी के सदस्यों के रूप में सक्रिय हैं. देश के प्रमुख सिने सोसाइटी में शुमार "पटना सिने सोसाइटी" फिर से अपने अस्तित्व में आने का श्रेय आर एन दास को जाता है .

श्री दास बिहार में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जिलाधिकारी गया एवं पटना ,आयुक्त ,पटना प्रमंडल, सचिव ,गृह विभाग, वित्त विभाग ,सुचना एवं जनसंपर्क विभाग ,मंत्रीमण्डल सचिवालय ,बिहार सरकार सहित कई महत्वपूर्ण पद पर आसीन रहे हैं .श्री दास साहब भारतीय प्रशासनिक सेवा से अवकाश प्राप्त करने के बाद भी बिहार में ही रहना पसंद किया .एक सशक्त सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बिहार में प्रथम पर्यावरण संबंधी संस्था "अभिजान" के तहत प्रदुषण नियंत्रण आदि पर इनका सराहनीय शुरुआत भी काफी चर्चा में रहा है.दम तोड़ती कई सांस्कृतिक संस्थाओं को पुनर्जीवन दिया तथा युवा कलाकारों एवं प्रशिक्षितों को मार्गदर्शन देना तो इनका शौक रहा है . विश्व सिनेमा ,विभिन्न भारतीय भाषायों में सिनेमा का स्तर, विकास एवं स्थिति पर इनके कई लेखों का प्रकाशन राष्ट्रीय तथा स्थानीय समाचार पत्रों ,पत्रिकाओं में होती आ रही है . वे वर्तमान में बहुसंख्यक शैक्षणिक ,सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हुये है. इनके निजी पुस्तकालय में करीब पचास हज़ार पुस्तकों का संग्रह है ,जिसमें अधिकांश पुस्तक अनोखा एवं विरल है .

सोसाइटी द्वारा हर वर्ष लगातार तीस से पचास कलात्मक एवं शैक्षणिक फिल्मों का प्रदर्शन (स्क्रीनिंग) होता है,जिसका प्रारूप डी.भी.डी एवं भी.सी.डी. में होता है .फिल्मों का प्रकार पुरानी अन्तराष्ट्रीय क्लासिकल फ़िल्में ,वर्तमान में विभिन्न भाषाओँ के पुरस्कृत फिल्मों का स्क्रीनिंग ,सत्यजीत रॉय ,गुरु दत्त,बिमल रॉय ,चार्ली चैपलिन तथा बुद्धदेव दास गुप्ता फिल्मोत्सव ,सिने एग्जिबिशन ,क्विज़ प्रोग्राम, विद्यालय -महाविद्यालयों में शोधात्मक एवं प्रयोगात्मक सिनेमा का स्क्रीनिंग ,समय समय पर प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन करती है .नियमित रूप से प्रत्येक शनिवार शाम तीन बजे से छः बजे तक फिल्मों का स्क्रीनिंग सुचना जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित "छवि गृह" लोकनायक जय प्रकाश भवन ,पटना के अतिरिक्त प्रत्येक माह में दो से तीन शो का स्क्रीनिंग अन्य स्थानों पर भी किया जाता है जैसे सोसाइटी के पुराने सहयोगी डॉ. दिलीप सेन के हॉलनुमा क्लिनिक ,बुद्ध मार्ग में तथा श्री दास के निजी आवास किदवईपुरी आदि में भी होता आ रहा है.

पटना सिने सोसाइटी, देश में प्रत्येक फिल्म फेस्टिवल एवं सिने गतिविधि से जुड़े तमाम कार्यकर्मों में आमंत्रित होता है ,जहाँ सोसाइटी अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर ढेर सारी अनुभवों के साथ सिने प्रेमियों के बीच साझा करती है.

देश में पहली बार राज्य सरकार के सहयोग से सोसाइटी वर्ष में दो या तीन बार "साप्ताहिक सिने कार्यशाला" का आयोजन करती है,जिसका लाभ फिल्मों में रूचि लेने वालों विद्यार्थियों को भलीभांति मिल पता है. सुचना जनसंपर्क विभाग , बिहार सरकार उन प्रतिभागियों को प्रोत्साहन के साथ साथ प्रमाण-पत्र भी देती है .इस कार्यशाला से लाभ प्राप्त कर एन. एस. डी. दिल्ली एवं एफ.टी. आई. आई.,पुणे जैसे भारत सरकार के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला लेने में कामयाब होता चला जा रहा है. इस कार्यशाला के शिक्षकों में सोसाइटी के स्वयं आर एन दास , प्रो.डॉ एन एन पाण्डेय, डॉ.जय मंगल देव ,विनोद अनुपम, गिरीश रंजन ,प्रणव साही, मिनती चकलानवीस के आलावा गेस्ट फेकल्टी के रूप में फिल्म निर्देशकों ,अभिनेताओं,समीक्षकों ,आलोचकों एवं सिनेविद्धों को भी आमंत्रित किया जाता है.


वर्तमान में सोसाइटी के अध्यक्ष आर एन दास ,उपाध्यक्ष डॉ. जयमंगल देव ,सचिव गौतम दास गुप्ता ,सहायक सचिव यु .पी. सिंह एवं चिराग उद्दीन अंसारी ,कोषाध्यक्ष कल्याण बनर्जी तथा कार्यकारी सदस्य शरद रंजन शरद ,प्रो. मुनिबा सामी ,डॉ. अनुराधा सेन ,नीरजा लाल के अलावा सैकड़ों सदस्य हैं !